Wednesday, 26 October 2016

किस्माँ.. .. !! !!

घ़िरथ बाहती चाह़ंग गलांगे

दस्सा पूरा पता किंह़िंया लाँग्गे

ओआ गप्पां- गप्पां सिखिये 

सारियां ह़ी जे किस्मां लिखिये

घ़रघ़याल़ू, टौपू,छौरे,द्रँगाल़, 

साकड़े, दबकू,चीमड़े घंडवाल़

पखलू, लीले, गाह़ले, घटवाल़, 

 मल़ाँच, बड़जात्ये, पत्रवाल़

बणचर, लाकड़िये, पटियाले़ , 

लौदरी,बराड़,भ़ाटे ता कजले़

 खट्टे, जगोतरे, मुंगरे, सैह़रिये ,

 नन्दे, चुपड़े, डब्बे, भनायरिये

चँघड़, तौसे, जौहड़, भड़वार,

 कलमाड़ी, मारकर,  मोर मार

 मुरैणे, समौऊ, फनार, नल़ौऊ, 

 डींग,जमनियाल़ कनें घड़ऊँ

न्ह़्ल़ेटु, बगोतरे, पाँजले, क्रोंक, 

बाह़्ड़ी, धनोटिये,बैद,भ़ल़ौंच

 अँगारिये, दल़वाँच, शँडियाल़ 

बगूड़े, ध़्रोंच, मींड्डे, कठियाल़

 
फ़रेटू,स्याल़,चीमड़े,मनियाल़ू 

रैंगणियें,मड़दांण तां नरियाल़ू

 भ़ूत, नाग, बलाह़रू, डगयाल़ू

 फिड्डु, कैंदल़ कने बगियाल़ू

 
कोई खपरु कोई जोखणूं रौड़ू  

साकी,चड़ेलू, राख्खे, खोड़ू

 
चीमड़े, रैंसू, मसँद, मनियाल़ू,  

दलबाड़च, कुड़याल़े, सराल़ू

हल्ली भी छुटी गये मते यारो 

इत्णेयां ने ह़ी तुसां कम सारो

याद जे ह़ोर तुसां जो ओंग्गे

 तां मैह़ते जो रिंग इक मारो 

No comments:

Post a Comment

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...