Wednesday, 26 October 2016

बोलता तेरा काम है... !! !!

यूँ ही नहीं तेरा हर इक जुबाँ पर नाम है,
तू तो चुप रहता पर बोलता तेरा काम है|

तेरे साथी तो फरमाते हैं चैन-ओ-आराम,
सामने तेरे मगर ये अल्फ़ाज़ ही हराम हैं|

स्वाद में कड़वा सही असर मीठा है बड़ा,
या ख़ुदा किस नायाब मदिरा का जाम है|

किसीको ख़ुश करने को देते जो गालियाँ,
मन-ओ-मगज से तुझको करते सलाम हैं|

तेज़ी से डरा है या अँदाज़ से जल मरा है,
बस क़ातिलना तेरा यह तर्ज़-ए-ख़िराम है|

                                   .. मनोज मैहता

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