Friday, 21 October 2016

कजो पाया तैं मैह़ता नोट्टाँ दा खलार ह़ै... !!

ठँडी ठँडी बझ़ौणा लग्गी पाणियें दी ध़ार ह़ै
सीह़म बगया नक्के ते कनें चढ़या बुखार है

मत करा बेह़ली चिंता सब ठीक ह़ोई जाणां
ह़ै नीं एह़ बमारी कोई बस मौसमें दी मार ह़ै

कजो नेताजी दे गोड्डे तुसाँ जिकादे भ़ाऊओ
इन्ह़ांदे अपणें मुँड्डे पर लटकोईयो तलवार ह़ै

किंह़ियाँ कि पंछैणनें ह़ुण जागत ताँ बिट्टियाँ
मुछ्छाँ भ़ी रख्खियाँ कनें लाईयो सलवार है

ताजे समाचार कैस बिच पढ़िये या दिख्खिए
नँग्गिंयां बस फोटुआँ ने भरोईयो अखबार  है

बगानियाँ लाड़ियाँ जो कजो टूरी टूरी दिखदा
कद्दई छैल़ मोआ तेरिया जणासा दी नुह़ार है

दूंह़ं त्रीं फुल्कुआँ खाई रज्जी जे जाँदा ढिड्डड़ू
कजो पाया तैं मैह़ता एड्डा, नोट्टाँ दा खलार ह़ै

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