Saturday, 20 August 2016

सब कुछ ही बहा ले जायेंगे!!

कब तक आख़िर याद ए ग़म इस दिल से संभाले जायेंगे
दरिया मेरी इन आँखों के तो सब कुछ ही बहा ले जायेंगे

इन वियवान राहों में भटकने से, तू क्यों डरता फिरता है
क्या पास है तेरे ऐ फ़ाकाकश, रहजन जो चुरा ले जायेंगे

तुझसे अफ़सुर्दा पायमाल-ए-ग़म, लाखों हैं इस दुनिया में
अजब पागल ये उजालों से भी अँधेरों को खँगाले जायेंगे

उदासी है चेहरे पर गहरी पर आस ज़िगर में है यह ठहरी
यह धड़क धड़क के कहता है आखिर वो मना ले जायेंगे

समेट ले तू अपने गम के सामाँ होने वाला है यहाँ हंगामा
ख़बर है कि कल बस्ती से सभी आशिक निकाले जायेंगे

काग़ज पर कलमें घिसघिस कर क्यूँ रातें काली करता है
फूंके तेरे संग ही ऐ मनोज तिरी गज़लों के रिसाले जायेंगे
                                                       .. मनोज मैहता

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...