वक़्त की छाती पर तुम कर धमाल दो
कुंठाओं को आग की भट्ठी में डाल दो
फ़ितरत को औरों की जकड़ना है तुझे
राह में बिछा इरादों का बुलंद जाल दो
है यूँ तो जीवन भी शतरंज की बिसात
मगर निधड़क चल पहली तो चाल दो
पहेलियाें सी मुश्किलें इम्तिहान हैं तेरा
उठो कि कर हल आज सब सवाल दो
इश्क या जंग में जो हरकुछ है जायज़
नयनों में पाज़ी के ठोंक मिर्चें लाल दो
फाड़ फैंको चोला मज़हबी चिथड़ों का
नही हो रहा झटका तब कर हलाल दो ||
... मनोज मैहता
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