छाती पर टैटू नँगा तन और कान में बाली है
कहलाने को तो है नेता पर लगता मवाली है
नशा किये हुये लगता है या भेजा फिरा हुआ
सभी ही मर्यादायें इसने तो जी तोड़ डाली हैं
वैचारिक मतभेदों पर ये गँदी गालियां देता है
शराब व चरस पीकर करता रहता जुगाली है
क्या होगा सरस्वती माता गॉडेस्स मिनर्वा का
जिस पावन दर की जिम्मे इसके रखवाली है
बेमुरब्बत सा ख़्वाब है बिगड़ा हुआ नवाब है
पैराशूट द्वारा उतरकर कुर्सी इसने संभाली है
हम तो नीचे लोग हैं जो भी कहना है कह लो
पर दाद दीजिये हमनें, ढंग से लिखी गाली है
.. मनोज मैहता
No comments:
Post a Comment