Tuesday, 15 September 2015

Reality of Congress in HP

काँग्रेस सँगठन के अँदर देखो बँदर बाँट लगी है
और काम तो कुछ नहीं होता काट-छाँट लगी है

उसे हटाओ उसे बनाओ, आपस में उन्हें लडाओ
दाँवपेंच में लगा रहा वो, यूँ ख़ुद की वाट लगी है

झूठ मूठ की रिपोर्टें हाई कमान तक पहुँचा दी हैं
असली रपट पर दराज़ में दीमक की चाट लगी है

यहाँ मज़े लगे चापलूसों के, एैश है चाटुकारों की
वफ़ादार सिपाहियों की और उलटी खाट लगी है

जीते हुए सरकार में हैं, सब हारे हुए दरबार में हैं
वर्करों क्यों चिंतित हो? तुम्हारे लिए टाट लगी है

राहुल गाँधी की नहीं हुज़ूर इन्हें खुद की है चिंता
यहाँ अगर न बन पाई तो उधर भी बात लगी है

बैठे हैं इस कुर्सी पर पर मन डोलता ही रहता है
यहाँ तो बस यूँही पड़े हैं, कहीं और घात लगी है
------------------ मनोज मैहता ---------------------

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