दिल की बात आपको क्यों सुनाई न दे?
छलका प्यार नज़रों में भी दिखाई न दे ।
मेरी वफ़ा तेरी ज़फ़ा का अजब मेल है ,
इस करिश्में की तो ख़ुदा भी दुहाई न दे ।
इश्क- मुहब्बत का यारो गज़ब खेल है ,
इसमें अच्छा या बुरा कुछ दिखाई न दे ।
छोड़ कर महफ़िलें अकेले बैठे हैं हम ,
बड़ी लम्बी भी या रब्ब तू जुदाई न दे।
उनकी हरकत से ख़ासा हूँ परेशान मैं ,
यह काम उन्हें कहीं मेरी रुसवाई न दे ।
सोच सोच कर पागल ही हो जाऊँ मैं,
एै रब्ब इतनी भी तू मुझे तन्हाई न दे ।।
-------------मनोज मैहता ------------------
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