"हिमाचल में नेता – नकाब के पीछे का राज"
बड़ी-बड़ी काली ऐनकों में घूमता है,
हर मंच से खुद को मसीहा बताता है।
सूट-बूट में लिपटा, बोले सेवा की बात,
भीतर से चलती बस जेबें भरने की घात।
होटल की ओटीएस खुद करवाकर बैठा है,
पत्नी-बहन के नाम सब कुछ सस्ता लेता है।
फाइलें साफ़, दस्तख़त भी क़ानूनी बताए,
पर पीछे से नियमों को पैर से कुचले जाए।
अफसरों की भीड़ लगा कर हनक जताता है,
थाने की पुलिस को पायलट बना कर घूमता है।
काफ़िला चले तो लगे जैसे कोई राजा हो,
पर असल में भीतर बस सत्ता का बाज़ार हो।
वादे किए थे “सरकारी नौकरी दिलवाऊँगा”,
“पेंशन और स्थायित्व का सपना सजाऊँगा।”
अब कहता है – “कंपनियों का दौर है भाई”,
बद्दी–काला अंब में भेज दी जवानी की कमाई।
जो बोले थे “सेना–बैंक में भरती आएगी”,
अब बोले – “प्राइवेट में ही तरक्की समाएगी।”
कंपनियों की नौकरियाँ, दस–बारह हजार वाली,
सपनों की जगह मिली, मज़दूरी की थाली।
जनता का भरोसा लूटा, आंखों में धूल झोंकी,
विकास की सड़क नहीं, पर आलीशान कोठी चमकी।
दावे थे “मैं तो एक सेवक हूँ जन का”,
पर हर फ़ैसला निकला अपने घर-परिवार का।
रोज़ बदलते वादे, हर दिन नई स्कीम,
बोलता है “योजना”, करता है “री-ड्रीम।”
काग़ज़ों पर सब कुछ लगता सुनहरा,
पर ज़मीनी सच्चाई कहती – “ये तो घोटाला गहरा।”
कुर्सी के लिए हर रिश्ता गिरवी रखा,
सवाल करने पर हर आवाज़ को नीचे दबा।
जो बोले सच, उसे बताया “शत्रु राष्ट्र का”,
अब डर नहीं, अब जवाब आएगा जनता का।
अब न बिकेगा झूठ, न चलेगा ये तमाशा,
ना अफसरों की हनक, न पुलिस का लाशा।
हिमाचल की मिट्टी अब चुप नहीं रहेगी,
अब सत्ता की गूंज नहीं, जनता की गूंज गूंजेगी।
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🔥 समाप्ति – अब जनता जागेगी 🔥
अब हिमाचल का बेटा-बेटी सवाल पूछेगा,
हर झूठे नेता से हिसाब सूद समेत माँगेगा।
जो पसीना बहाए वही असली पहाड़ी कहलाए,
बाक़ी सब दिखावे वाले अब ताश के पत्ते उड़ जाएं।
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