शिव कैलास में, शिव श्मशान में,
शिव हैं मिट्टी में, शिव हैं गगन-स्थान में।
शिव हैं बिंदु, शिव हैं नाद,
शिव हैं अग्नि, शिव हैं प्रमाद।
कण-कण में शिव का वास सदा,
प्रलय भी हो तो नाश न होगा।
शिव जल में हैं, शिव थल में हैं,
शिव अदृश्य भी इस पल में हैं।
हजर-अल-अस्वद भी हो सकता द्वार,
जहाँ टिके मन, वहीं हो संसार।
न सीमाओं से बँधते त्रिपुरारी,
न केवल पूजन, न केवल पुजारी।
जो देखे भाव से, पावे उन्हें,
न मंदिर ढूँढे, न काबा गिने।
श्रद्धा का दीप जलाए मन,
तो हर दिशा में दिखें भगवंत।
काले पाषाण में भी हो प्रकाश,
यदि अंतर्मन हो विशुद्ध, विलास।
क्या फर्क अगर वो शिव कहे न जाए,
यदि भीतर से ‘ॐ’ की गूँज आए?
🕉️ "शिव हैं मौन, शिव हैं स्वर,
शिव हैं जीवन का परमाधर।" 🌌
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