Wednesday, 24 September 2025

मूर्ख लीला

वाह! अब आपने बात सीधी अयोध्या से जोड़ दी 😄

तो लीजिए, प्रस्तुत है:

📜 “सींग चरित मानस”

(रामचरितमानस की शैली में रचा गया — मूर्खता पर आधारित हास्य-व्यंग्य महाकाव्य)


🕉️ मंगलाचरण

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं सींग सुभाय।
मूर्ख महा रस लेत जहँ, हँसत हँसे सब काय॥


🌟 बालकांड – "सींगावतार"

भए प्रकट जब मूर्ख समाजा,
उग आए सींग, बड़े ही राज़ा।
नृप मूर्खेश्वर सिंह बिराजे,
माथे सींग, मन में अंधियारे।

शिक्षा मंदिर होए विचित्रा,
गणित न व्यापे, मूर्खता मित्रा।
गुरु ज्ञानगिरी पढ़ावत पाठा,
‘सींग-संस्कृति’ बस यही ठाठा।


❤️ अयोध्याकांड – "प्रेम और प्रमाद"

प्रेमचंद ने रूबी निहारी,
सींग दिखा कर बोला प्यारी —
“तेरे लिए मैं सींग तुड़ाऊँ,
मूर्ख बना सब को बतलाऊँ!”

रूबी बोली, “मन भा गयो,
तेरी मूर्खता पे दिल आ गयो।
IQ वाले तो रहते रूखे,
तू तो निकला पूरे सींगूखे!”


🏛️ अरण्यकांड – "बुद्धिनाथ का वनवास"

एक रहा सींगहीन प्राणी,
नाम था उसका बुद्धिनाथ ज्ञानी।
राज सभा में ताना पाया,
“सींग नहीं, तू काहे आया?”

दिया उसे वनवास भयानक,
बुद्धि लिए वो चला अकेला निष्कलंक।
वन में सींगों का मेला देखा,
हर दिशा में मूर्खता फैला।


📺 किष्किंधाकांड – "टीवी और तांडव"

चीखिका नाम न्यूज ऐंकर,
चिल्ला-चिल्ला बन गई बैंकर।
घोषित किया ब्रेकिंग न्यूज़,
“सींगहीन हैं राष्ट्र के विरुद्ध!”

डिबेट चली, बहस बुलाई,
नेता घुमाव सिंह ने सुनवाई।
बोला — “सींगों से ही विकास,
बाक़ी सब बुद्धिवादी विनाश!”


🩺 सुंदरकांड – "HornCare हॉस्पिटल"

डॉ. सींगनाथ, सर्जन न्यारा,
सींग उगाना उसका काम सारा।
बुद्धिनाथ को पकड़ लाया,
बिना सींग देख रो पड़ा साया।

बोला — “तेरे मस्तिष्क में है प्रकाश,
ऐसा रोगी पहली बार पास।
चल हट, तू तो ज्ञानी निकला,
सींग नहीं, ज्ञान से झलकता!”


🏁 लंका कांड – "सींगों का युद्ध"

राज्य सभा में सभा बुलाई,
बुद्धिनाथ ने बात सुनाई।
बोला — “मूर्खता को पूजोगे जब,
समझदारी रोएगी तब।”

घमासान फिर युद्ध छिड़ा,
सींग-बुद्धि का भेद मिटा।
अंततः जो मूर्ख बने ज्ञानी,
उन्हें ही मिली असली महारानी।


🕊️ उत्तरकांड – "ज्ञान की वापसी"

सींग उतारे, मन भी संवारे,
गाँव-शहर में दीप जलाए।
बुद्धिनाथ को मस्तक नवाया,
राजा खुद फिर ज्ञान अपनाया।

सींग नहीं अब सम्मान होते,
जो सोचें — वही श्रीमान होते।
मूर्खता का भी समुचित स्थान,
पर न बने वो जीवन का मान।


📚 समापन चौपाई

सींग चरित जो पाठ करेगा,
हँसी-हँसी मन प्रफुल्लित होगा।
बुद्धि-बिन जो गर्व करेगा,
वो अंत में पछताएगा।


😂🙏 जय हँसीनाथ! जय मूर्खेश्वर!

सींग लगाओ जब हँसी लानी हो,
पर सोचो ज़रूर जब ज़िम्मेदारी निभानी हो।



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