इक पता नहीं कौन मित्रो, बैनमोर में रहता है
है तो सी.पी.एस. ख़ुद को मिनिस्टर कहता है
कोई उसे समझा तो दो इतनी बात बता तो दो
कैबिनेट के बाद राज्य व डिप्टी मन्त्री आता है
थोड़े वक्त की बात है आगे घोर अन्धेरी रात है
तब ही हर कोई उसकी बात में हँसता रहता है
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भेड़िए मर्द का देखना ...
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
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--- ग़ज़ल चले भी हम, दौड़े भी हम, मगर शायद बेवक़्त तभी तो मंज़िल न मिली, थक गए हम कम्बख़्त। किसी ने राह दिखाई, किसी ने धोखा दिया, मगर न थमी ...
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