राजनीति को बना दिया इसने गाली गलौच का अखाड़ा
अमर्यादित ढँग से लिखता रहता अगाड़ा या पिछवाड़ा
"यत्र नार्यास्तु पूजयन्ते रमयन्ते तत्र देवता" श्लोक को
इस अधम नीच ने प्रिय मित्रो जड़ से ही फैंक उखाड़ा
कांग्रेसी होने के मानी ये नहीं कि हिंदुत्व का निरादर हो
इसी मानसिकता की वज़ह से खूब पिटा हमारा नगाड़ा
Tuesday, 6 September 2016
नी भा
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भेड़िए मर्द का देखना ...
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
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🌺 भृगु-वंश महाकाव्य गान 🌺 नारी-पक्ष बुआ इंदू आज के दिन यूँ फिरती इतराती, ज्यों कोकिला उछल-उछल कूकू करती जाती। बंदना, ऋतु, सीमा, नीतू की दे...
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--- ग़ज़ल चले भी हम, दौड़े भी हम, मगर शायद बेवक़्त तभी तो मंज़िल न मिली, थक गए हम कम्बख़्त। किसी ने राह दिखाई, किसी ने धोखा दिया, मगर न थमी ...
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