छोड़िये जी ख़ुन्नसे छोड़िये भी नफ़रतें
तुमको क्या भाती हैं, अपनी ये हरकते ?
नाकाम हैं कोशिशें, बेपर्दा हुईं साजिशें
काम को ही करते,ये मेहनते मशक्कतें |
खोया है चैन क्यूँ, दिल को क्या है सुकूँ
बदलते से रहते हो,क्यूँ रात भर करवटें ?
उस बियावान में उसके कारण है बहार
तुम भी सींचो ख़ूँ से, पानीं हैं ग़र ज़न्नतें |
ख़ुदा किरदार का करिये ख़ुद मुआइना
शौक से तब डालिये दूसरों पर तोहमतें |
पीले चेहरे न खिले, जोश से यूँ तो मिले
झूठी हैं ये यारियाँ और झूठी हैं मुहब्बतें ||
.. मनोज मैहता
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