Tuesday, 13 September 2016

जय कांग्रेस ....!!

हम गर्व से कहते हैं कि हमने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य होने के नाते यह शपथ ली है कि हम धर्म संप्रदाय व जातिपाति में विश्वास नहीं रखेंगे व इस कसौटी पर पूरा उतरने की कोशिश भी करते हैं| कुछ लोगों का कार्य सिर्फ जाति के नाम पर राजनीति करना है और हमें उनसे यह शिकवा भी नहीं कि वे ऐसा क्यों करते हैं | आज भी कोई ऐसी बैठक हुई होगी जिसकी कोई बड़ी चर्चा हमने तो सुनी नहीं | पर कहीं ये अफवाह उड़ते उड़ते पहुँची कि किसी बैठक में दो जातियों में दरार पैदा करने केपर्चे बँटे व उसके बाद उसी सभा में कुछ बहुत ही लछेदार पर्चे भी किसी नें बांट दिये, किसी फेसबुक चैनल की रिपोर्ट कोई मुझे भी पढ़ा गया| अब यह तो मेजबानों की जिम्मेवारी बनती थी कि इसका पता लगाते या शांत करवाते | पर सुना है जाते जाते रंगीन पर्चों पर बड़ी चर्चा होती रही| पता चला कि पर्चे वहीं पर मौजूद लोग बंटवाते रहे और कोई दलीलें दे रहा है कि हमने वहां से भगा दिया ओहो..!! इतनी बड़ी सभा थी सात आठ सौ लोगों की अगर पर्चे बांटने वाले बाहरी व्यक्ति होते तो पकड़े न जाते क्या ???? छोड़िये... जनता जानती है कि उनका हितैषी कौन है... किसी के कहने से या लिखने से कुछ नहीं होता ||

No comments:

Post a Comment

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...