हमारा नहीं ख़ुद का ही सब कुछ बिगाड़ लेंगे
तय है कि ये सरफिरे काश्मीर को उजाड़ देंगे
पैगबंरों की नेक बातों के बदल डाले मतलब
एक दिन ये लोग इस्लाम को ग़र्त में गाढ़ देंगे
ख़ुदा से उलट खुद करते, कहते हमें काफ़िर
लहू से रँग डाली सारी, अब कुर्रान फाड़ देंगे
कुछ समझो अंधे बहरो, इस बात पे तो ठहरो
सैलानियों के बिना तुम्हें क्या झीलें पहाड़ देंगे
पाक के नापाक किस्से ग़म आयेंगे तेरे हिस्से
ग़र ज़िद पे आये हिंदी तो सीनों को फाड़ देंगे
.. मनोज मैहता
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