Friday, 30 January 2026

बदलोणां लग्गे

होराँ  दियां  गप्पां क्या करिये,  पहाड़िये भी बदलोणां लगे,
बंदरियां-खिंदां च  दड़णें वाले, रजाइयाँ  गद्देयां  टोणां लगे।

गोलूआं मिट्टी कुत्थु सेहू रेहई, अरो कुनी फेरणी हुण दळेई,
ढाई  मुकाई  करी  कच्चियां कंधां, पक्के  लैंटर  पौणां लगे।

न चुल्ही रिहियां न पचोले रेह, न ही लकड़ू रेह न क्यौले रेह,
स्टोवां  दे  बर्नल गे मुक्की, हुण  गैसां पर  भत्त रन्ह़ोणा लगे।

बंगां, परांदू, रिबनां भुल्लियां,  जीन फसाई बडियां फुल्लियां,
बिटियां छोहरू  बणीं के  हंडुन,  जागत कन्नें  चतरोंणां लगे।

ह़ोआ  दे  झोंके  ऐसे झुल्ले,  सांदीं, समुह़त ता मैन्नेयां भुल्ले,
कुणी  पिटणियां  एह चौधऱां,  पैलसां बिच  ब्याह होणां लगे।

नौंआं  जुग  है  नौंइयां गल्लां,  कुत्थु  तोपादा पारुआं डल्लां,
मैह़तेया तू  मोआ  जबरा  होया,  जवान  न्याणे  ह़ोणां  लगे॥
— मनोज मैहता

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