बेकार बहाना न यह करो कि तबीयत ख़राब है,
हमारी सूरत बुरी सही, उनकी तो नीयत ख़राब है
शैतान बेचारा यूँ ही बदनाम रहा है सदियों से,
असल में हव्वा के जाए की आदमियत ख़राब है
हर बात का इल्ज़ाम सदा मद के मारों पे धर दिया,
जो मासूम नज़र आते हैं, उनकी सूफियत ख़राब है
रंगीँ किताब पढ़ कर छुपाता जो कुरान शरीफ़ में,
वो कहता है फिरता कि क़ायद-ए-शरीअत ख़राब है
हालात के मारे हर शख़्स से तमाशा किया गया,
सच है ऐ ख़ुदा, तेरी ज़मीं की मिल्कियत ख़राब है
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