सात लोक (संक्षेप व शुद्ध क्रम में)
सनातन ब्रह्मांड-दर्शन में ऊर्ध्व (ऊपर) के सात लोक इस प्रकार माने गए हैं—
1️⃣ भूः लोक (भूलोक)
👉 पृथ्वी, मनुष्य का लोक
👉 कर्मभूमि — यहीं कर्म होते हैं
2️⃣ भुवः लोक
👉 पृथ्वी और स्वर्ग के बीच का लोक
👉 पितृ, गंधर्व, यक्ष आदि का वास
👉 संक्रमण लोक
3️⃣ स्वः लोक (स्वर्ग लोक)
👉 देवताओं का लोक, इंद्र का राज्य
👉 भोग और पुण्य का फल
👉 पुण्य क्षय होने पर पुनर्जन्म
4️⃣ महः लोक
👉 महर्षियों का लोक
👉 तप, साधना और दीर्घ आयु
👉 भोग से ऊपर की अवस्था
5️⃣ जनः लोक
👉 ब्रह्मज्ञानियों का लोक
👉 कामनाओं से मुक्ति
👉 सूक्ष्म चेतना
6️⃣ तपः लोक
👉 महान तपस्वियों का लोक
👉 निरंतर तप और वैराग्य
👉 अहंकार का पूर्ण क्षय
7️⃣ सत्य लोक (ब्रह्मलोक)
👉 ब्रह्मा का लोक
👉 जन्म-मृत्यु से परे
👉 मोक्ष के निकटतम
🔱 एक पंक्ति में सार
भूः से सत्य तक की यात्रा = कर्म से मोक्ष तक की यात्रा
या यूँ समझिए—
लोक स्थान नहीं, चेतना की सीढ़ियाँ हैं।
No comments:
Post a Comment