Thursday, 29 January 2026

आखिर ये भी पानी है

हर  रिंद  के  लब  पर  यारों बस  यही  कहानी  है
दारू  से  क्यों  चिढ़ते  हो, आख़िर  ये भी पानी है

दिल  ने  जो  कहा  सच कहा, दुनिया को हैरानी है
आईना  दिखाना  भी  अब जुल्म  की  निशानी  है

तौबा  का  भ्रम  रखकर,   ग़ाफ़िल  न  रहो  इतना
नियत  की  अगर  मैली  हो,  पाकीज़गी बेमानी है

मस्जिद हो या मयख़ाना, चाहिए बस सुकूँ दिल को
हर   जगह   वही   इंसाँ   है,  हर जगह परेशानी है

हम   पर जो उछालो पत्थर,  अपना भी ज़रा देखो
ऐ   शीशे   के   मकाँ   वालो,    ये कैसी नादानी है

लफ़्ज़ों   की   ये बाज़ी  भी    अक्सर हमें बहकाए
ख़ामोश   जो  रह जाए,  उसकी   अलग कहानी है

मनोज   ये  कहता  आख़िर,  तजुर्बे की  जुबानी है
कम  बोलने  वाला  ही,  ख़ुद  सबसे गहरा ज्ञानी है

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