Saturday, 31 January 2026

अटलांटिस नहीं द्वारिका में है दम


 
अरब सागर की लहरों में, सुनो कोई कहानी,
जहाँ कृष्ण की नगरी डूबी, छोड़ कर अपनी निशानी।
पत्थर की दीवारें, स्तंभ और लंगर सब चुप,
पर ज़मीन पर द्वारिका आज भी जागती, जैसे जीवन का रूप।
दूर पश्चिम में अटलांटिस, प्लेटो द्वारा लिखित कहानी,
अहंकार और शक्ति का पतन, डूब गई पानी में शैतानी।
कोई अवशेष नहीं, केवल चेतावनी की आवाज़,
सभ्यता का नशा उतरा, खो गया उसका राज़।
द्वारिका कहती है: समय की लय में सब विलीन,
अटलांटिस कहता अहंकार का फल है ग़लत और गमगीन।
एक नगरी पावन स्मृति, समुद्र में अपने चिन्ह छोड़ती,
दूसरी कपोल कल्पना, चेतावनी की परछाई पर दौड़ती।
लहरें गाती हैं दोनों के नाम,
एक है आस्था, एक दार्शनिक प्रमाण।
डूबना भी अलग, सीखना भी अलग,
समय की छाया में, दोनों मिलाते हैं रहस्य के क़दम।
अटलांटिस नहीं, द्वारिका में है दम।


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