सात चक्र (योग एवं तंत्र शास्त्र के अनुसार)
सनातन योग-दर्शन में मानव शरीर को केवल मांस–हड्डी का ढाँचा नहीं,
बल्कि ऊर्जा और चेतना का जीवित ब्रह्मांड माना गया है।
इस ब्रह्मांड में चेतना के सात प्रमुख केंद्र हैं—इन्हें सात चक्र कहते हैं।
🧘♂️ सात चक्रों का क्रमबद्ध विवरण
1️⃣ मूलाधार चक्र
📍 स्थान: रीढ़ की हड्डी का मूल (गुदा और जननेंद्रिय के बीच)
🔴 रंग: लाल
🔱 तत्व: पृथ्वी
🧠 भाव: सुरक्षा, स्थिरता, भय
🕉 अर्थ: “मैं हूँ”
👉 जीवन की नींव यहीं से शुरू होती है।
2️⃣ स्वाधिष्ठान चक्र
📍 स्थान: नाभि के नीचे
🟠 रंग: नारंगी
🔱 तत्व: जल
🧠 भाव: कामना, रचनात्मकता, संबंध
🕉 अर्थ: “मैं अनुभव करता हूँ”
👉 सुख-दुःख की अनुभूति यहीं से उठती है।
3️⃣ मणिपूर चक्र
📍 स्थान: नाभि
🟡 रंग: पीला
🔱 तत्व: अग्नि
🧠 भाव: शक्ति, आत्मविश्वास, क्रोध
🕉 अर्थ: “मैं कर सकता हूँ”
👉 इच्छाशक्ति और निर्णय का केंद्र।
4️⃣ अनाहत चक्र
📍 स्थान: हृदय
🟢 रंग: हरा
🔱 तत्व: वायु
🧠 भाव: प्रेम, करुणा, क्षमा
🕉 अर्थ: “मैं प्रेम करता हूँ”
👉 यही चक्र मनुष्य को मनुष्य बनाता है।
5️⃣ विशुद्ध चक्र
📍 स्थान: कंठ
🔵 रंग: नीला
🔱 तत्व: आकाश
🧠 भाव: सत्य, अभिव्यक्ति, वाणी
🕉 अर्थ: “मैं बोलता हूँ”
👉 सत्य की आवाज़ यहीं से निकलती है।
6️⃣ आज्ञा चक्र
📍 स्थान: भौंहों के बीच
🟣 रंग: जामुनी / नील
🔱 तत्व: मन
🧠 भाव: अंतर्ज्ञान, विवेक, ध्यान
🕉 अर्थ: “मैं देखता हूँ”
👉 तीसरी आँख—ज्ञान का द्वार।
7️⃣ सहस्रार चक्र
📍 स्थान: सिर का शीर्ष
⚪ रंग: श्वेत / बैंगनी
🔱 तत्व: चेतना
🧠 भाव: मोक्ष, ब्रह्मानुभूति
🕉 अर्थ: “मैं हूँ वही”
👉 यहाँ ‘मैं’ समाप्त होता है।
🌸 चक्र और जीवन-यात्रा
मनुष्य का आध्यात्मिक विकास
मूलाधार से सहस्रार तक की यात्रा है—
भय → इच्छा → शक्ति → प्रेम → सत्य → ज्ञान → मुक्ति
🔱 सार-संक्षेप तालिका
क्रम
चक्र
स्थान
भाव
1
मूलाधार
रीढ़ मूल
सुरक्षा
2
स्वाधिष्ठान
नाभि नीचे
इच्छा
3
मणिपूर
नाभि
शक्ति
4
अनाहत
हृदय
प्रेम
5
विशुद्ध
कंठ
सत्य
6
आज्ञा
भ्रूमध्य
ज्ञान
7
सहस्रार
मस्तक
मोक्ष
मनोज मैहता
No comments:
Post a Comment