Wednesday, 25 May 2016

बुरा मौसम बो!!

ऐह़ण पोआ दी औल़े बराह़ दे ,
इंद्र देओजी, एह़ क्या करा दे ?

कद्की गरमी, कद्की ठंडक ,
रंड्डां सांह़िंयाँ, नाटकां करा दे |

चल्ला झ़ख्खड़ ह़ाईबो जान्नीं ,
जणासां डड्डियां, बच्चे डरा दे |

अम्ब, मरूद, लीचियां दे दाणें,
समेत डाल़ुआं-पत्तरां झ़ड़ा दे |

दकानां आल़े म्ये बै़ठ्ठयो बेह़ले ,
तां फड़ियाँ वाल़े मौजाँ करा दे |

भ़ज्जयो रुख्खाँ तोड़ियाँ ताराँ ,
बिजलिया आलें थकैमें मरा दे |

लुग्गड़ ह़ोया ग्वाल़ू जे मछरया,
डँग्गर बचारे, फुलणुंयें चरा दे ||

No comments:

Post a Comment

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...