रूठने का फायदा ही क्या, जब वो मनायेंगे नही ,
यत्न जितने चाहे कर लो, पास अब आयेंगे नही |
मिन्नतें भी देखीं करके, बड़ी ज़लालत की सहन ,
टेके बहुत घुटने हमने पर अब गिड़गिड़ायेंगे नही |
सुर्ख आँखें, खुश्क चेहरा, अजीब सब हालात हैं ,
लेकिन वो ग़मग़ीन तर्रानें, कभी गुनगुनायेंगे नही |
गूँजेंगे जब जब कानों में, वो कहकहे तेरे सुरमई ,
सुकून तो दिल को आयेगा मगर मुस्कुरायेंगे नही |
देख कर जिनको तुम, माँगते थे दुआयें प्यार की ,
आसमाँ में टूटते हुये तारे, अब नज़र आयेंगे नही ||
--------------------------------------- -मनोज मैहता
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