Wednesday, 11 May 2016

कभी कभी ज़िंदगी में...!!

कभी कभी ज़िंदगी मे ऐसे वक्त आते हैं ,
कि अपनें भी पास ही से, गुज़र जाते हैं |

हमनें बहार को देखा है उस मुकाम तक ,
तभी तो दौरे- ख़िज़ां में भी, मुस्कुराते हैं |

जो गरज़ते तो हैं मगर कभी बरसते नहीं ,
नभ में ऐसे भी कभी बादल दनदनाते हैं |

दूजों की करके किरकिरी हँसते हैं बहुत ,
हमारी जरा सी बात पे और तमतमाते हैं |

आदी है जो परिंदे बंद पिंजरों में रहने के,
खुले में भी उड़ते नहीं बस फड़फड़ाते हैं |

इतनी ललचाई नज़र से न देखिये इनको ,
ये सामाँ बस शो रूमों में ही चमचमाते हैं ||
---     ---     ---     ---     - मनोज मैहता

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