Monday, 30 May 2016

उसको....!!

उसकी बातों पर गुस्सा नही, अब रहम आता है , आजकल मुस्कुराहट पर भी, वो सहम जाता है | मन तो उसका मचलता है, मुझसे बात करने को, बीच में कमबख़्त लेकिन, उसका अहम आता है | मेरी शोखी पर चिढ़ जाना उसका है समझ के परे, दुश्मन मेरा सुना उसको, कुछ गरमागरम आता है | सोचता हूँ मैं कि अब उसको मशविरा यह दे ही दूँ , जलन नही ज़िक्र में पर आदमी का करम आता है | किरदार उसका जैसा भी हो मैं क्यों तफ़सरा करूँ, जुल्म उसको ढाना तो मुझे निभाना धरम आता है | पीठ पीछे तंज़ कसना, उसकी पुरानी फितरत है, चलो इस ही बहानें हर जगह, मेरा नाम आता है |

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