Thursday, 5 May 2016

Don't keep on testing my Love

बार बार तो यूँ इश्क का, न इम्तहान लीजिये ,
ग़र लेनी ही है आपनें, तो मेरी जान लीजिये |

आपके वास्ते सिर, हथेली पर लिये फिरते हैं ,
हलाल करनें के बस, साज़ो सामान लीजिये |

घुट घुटकर यूँ भी तो वर्बाद ही है यह हो रही ,
हाथ में मेरी ज़िंदगी की, खुद कमान लीजिये |

आपकी ही तलब है और आपकी तड़प इसे ,
नोंच आप इस दिल के सारे अरमान लीजिये |

वापिस राह-ऐ- इश्क़ पर लौट तो मैं आऊँगा ,
आप दफा होनें का वापिस फ़रमान लीजिये ||
---     ---     ---     ---     ---     --- मनोज मैहता

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...