अपने ही दम पर दुनिया जीत लूँगा मैं ,
तूफानों से टकरानें का जोश रखता हूँ |
उनके उकसाने से, मुस्कान खिल उठी ,
वक्त पर काबू मैं, अपने होश रखता हूँ |
मत दिखाईये मुझे, चोट- मौत का भय ,
हूँ !और साथ भी, सरफरोश रखता हूँ |
हर चीज़ पर अपना हक जताने वालो !
क्या शक्ल से मैं ख़ानाबदोश लगता हूँ ?
चलिये आप ही बड़े और मैं छोटा सही,
चंद और दिन यूँ भी मदहोश रखता हूँ |
वज़ूदों की जँग का लोग करेंगे फैसला ,
सबके सामने अपने गुण-दोष रखता हूँ ||
------------------------------ - मनोज मैहता
nice mehta bahi
ReplyDelete